Saturday, May 31, 2014

...किसका ये गुनाह है

क्या पता किसकी खता है,किसका ये गुनाह है 
सच तो ये है के आज दिल मुकम्मल तबाह है 
गुजरते हुवे वक़्त ने छीन लिया है मुझसे उनको 
धुंधलाते उनके सायो पे अब भी मेरी निगाह है 

Wednesday, May 28, 2014

....तेरी मजबूरीयों का

बेवफा तुझको भी कहु कैसे,मुझे अहसास तेरी मजबूरीयों का
प्यार किया है तुमसे तो,मुझे भी पता है मेरी कमजोरियों का 
आसान नहीं है फिर भी ये जानना के अब साथ नहीं है अपना 
नजर आ रहा है मुझको वो मंजर जिंदगी की दुश्वारियों का 




Tuesday, May 27, 2014

...जिंदगानी नहीं है

क्या करे साथ तेरे अब और ये जिंदगानी नहीं है 
मेरी नजर में फिर भी तेरा कोई सानी  नहीं है
तेरा तसव्वुर तेरी आरज़ू तो है आज भी मुझको 
है एक सोज़ दिल में मगर आखो में पानी नहीं है 


Monday, May 19, 2014

...बताया है

कुछ जला के बुझाया है,कुछ बुझा के जलाया है
हमने हक़ जिंदगी से कुछ इस कदर जताया है
औरो की बेवफाई को अक्सर अपने सर पे उठाके 
अपने आप को इस जमाने में बेवफा बताया है 

Thursday, May 15, 2014

...है कोई

मुझ को मुझ से आजकल चुरा लेता है कोई 
मैं खो जाता हूँ,मुझ को छुपा लेता है कोई 
कोशिश है इस जमी पे ही रहू दिल थामे हुवे 
पर आसमा तक मुझको उठा लेता है कोई 


Wednesday, May 14, 2014

...के बाद

सोचता हूँ के कितनी बार लिया होगा मैने नाम तुम्हारा 
शायद उतना ही,जितनी साँसे जीया हू तुम्हे चाहने के बाद 
और क्या जुस्तजू रही होगी,मेरी इन तरसती निगाहो को 
और भला क्या देखना चाहेगी वो बेचारी,तुम्हे देखने के बाद 

Monday, May 12, 2014

ऐसा भी हो सकता है?

मै कुछ कहूँ और तुम खामोश रहो,क़ोई ताल्लुक ऐसा भी हो सकता है? 
मै पलके बिछउ और तुम न आओ,कोई तक़ल्लुफ़ ऐसा भी हो सकता है? 

Thursday, May 8, 2014

...हो जाउ

तेरा खयाल न करू तो इस दिल का मुज़रिम हो जाउ  
तेरे खयालो मे रहू,तो दर्द ओ गम मे तक़सीम हो जाउ  
तू ही बता दे अब के कैसे निभाउ मै ये मोहब्बत तेरी 
तू कहे तो जी लू,ना कहे तो जिन्दगी से यतीम हो जाउ