Thursday, February 21, 2008

अक्स

तू सामने भी नही होती,फिर भी रहती हो नजरो मे
है शै मे दिखता है मुझको अक्स तेरा

महक

जरूर आई होगी ये बाद-ऐ-सबा उनके आँचल को छू कर
वरना किसी और मे वो बात कहा,जो महका सके इस जहाँ को

Friday, February 15, 2008

भरम

सोचा था मैंने के आप संग-दिल नही,
अब के जाना,आप के सीने मे पत्थर के सिवा कुछ भी नही

Saturday, February 2, 2008

दोस्ती

छूटे तो छुट जाये पतवार मेरी कश्ती का
मिटे तो मिट जाये निशा मेरी हस्ती का
दर्द भी ख़ुशी बन जाएगा मेरे लिए
जब तलक रहूंगा थामे दामन मैं तेरी दोस्ती का