Friday, November 4, 2011

...मुलाकात होनी चाहीये

हालात हो न हो मगर आपस में कुछ बात होनी चाहीये
हम कुछ खेले न खेले,बिछी हुवी ये बिसात होनी चाहीये
सुख के उन धागों में आज,वो एक असर नहीं ना सही
चलते चलते किसी मोड़ पर,एक मुलाकात होनी चाहीये


5 comments:

Sarika Mukesh said...

Achchha khayal hai!!

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

मनीष जी बहुत सुन्दर जज्बात और अहसास आप के ..सच में चलते चलते किसी मोड़ पर
भ्रमर ५

SPIRIT OF JOURNALISM said...

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Suman said...

nice

Prabodh Kumar Govil said...

ummeeden yoonhi kayam rahen, mulaakaaten akhir kab tak n hongi, duniya bahut chhti hai, aur log sirf saat arab.