Monday, August 27, 2012

जब से छोड़ा है तुमने मुझ को 
तुम तो अब तुम्हारे भी न रहे 
जिन सितारों की खातिर तुमने चाँद को है ठुकराया 
अफ़सोस! फलक पे अब वो सितारे भी न रहे ......

Monday, March 5, 2012

...ऐसा कुछ भी नहीं

मुझे तुमसे नफरत है,ऐसा कुछ भी नहीं
दिल को एक गैरत है,ऐसा कुछ भी नहीं
बाकी है यादे तेरी,मेरे मजलिस-ए-दिल में
ये दौर-ए-खिलवत है,ऐसा कुछ भी नहीं

Monday, November 28, 2011

...तुम भी नहीं

मुझको बेवफा कहनेवालो,बा-वफ़ा तो तुम भी नहीं
मेरे गमो पे हसनेवालो,खुशनुमा तो तुम भी नहीं
मेरे जख्मो से कुछ तो वास्ता है आखिर तुम्हारा भी
मुझको मार के बचनेवालो,यु तो जिन्दा तुम भी नहीं

Friday, November 4, 2011

...मुलाकात होनी चाहीये

हालात हो न हो मगर आपस में कुछ बात होनी चाहीये
हम कुछ खेले न खेले,बिछी हुवी ये बिसात होनी चाहीये
सुख के उन धागों में आज,वो एक असर नहीं ना सही
चलते चलते किसी मोड़ पर,एक मुलाकात होनी चाहीये


Friday, September 23, 2011

...को भूल जाऊ

ये तो कोई और है के मै तेरी परछाई को भूल जाऊ
तेरे खयाल में ही रहू और इस तनहाई को भूल जाऊ
आयी हो चाहे तब्दीली तेरी नजर में आज फिर भी
तेरी आरजू में ही रहू और इस बेवफाई को भूल जाऊ



Saturday, July 30, 2011

तल्खिया -- एक डर

तल्ख़ जुबा वालो,जरा और तल्ख़ी से काम लो
पता तो चले,के ये जहर और कितना है बाकी
ये हो जाये,तो झांक लेना तुम गिरेबा में अपने
जान लोगे,के तुम में ये डर और कितना है बाकी  


Wednesday, July 27, 2011

...गमगुसार बन के

चले आते है वो अक्सर,बड़े ही गम-गुसार बन के
छुपाके उस शगुफे में दरअसल,वो खार ले आते है
जुबा पे न हो,पर तल्खिया नजर आती है आखो में
जताते है ऐसे,के सारे ज़माने का वो प्यार ले आते है