Sunday, May 8, 2011

...कोई कमी सी

बस एक नजर देखो तुम,हर जख्म का मरहम इसी में है
खामोश दिल का मुस्कुराना,अब भी तुम्हारी ख़ुशी में है
इन्कार न करना ऐ दोस्त,के मेरा दिल कह रहा है मुझसे 
के मेरे बगैर कोई कमी सी,आज भी तेरी जिंदगी में है     


Friday, May 6, 2011

आगाह

सोज़-ए-दिल से मुसलसल,फन-ए-ज़िंदगी सिखता हूँ मै 
दौर-ए-मसर्रत ने आज तक,गुमराह ही किया है मुझको 
लोग तो ख़ुशी के मारे,होश-ओ-हवास खो बैठते है अपना
वक़्त-ए-सुकूं  ने लेकीन,दर्द से आगाह ही किया है मुझको 

सोज़ -जलन 
मुसलसल-लगातार
फ़न -कला
मसर्रत -सुख 

Saturday, April 30, 2011

...बाकि कुछ हुवा भी नहीं

पूरी तरह से टुटा भी नहीं,पूरी तरह से बचा भी नहीं
बिच राह में खड़ा है रिश्ता,किसी तरफ गया भी नहीं
दिखाती है जो मक़ाम जिंदगी,मंजूर कैसे न करे हम 
दिल बस दुखता है जरासा,बाकी कुछ हुवा भी नहीं 

Friday, April 8, 2011

...बदल जाता है

वो रोज़ मिलते है तो ये दिल-ऐ-नादाँ बहल जाता है
कितनी बार गिरते गिरते दीवाना सम्हल जाता है डर लगता है लेकिन ये उम्मीद भी न टूट जाये कहीं 
के जरा सी बात पर आज-कल इंसान बदल जाता है 



Thursday, April 7, 2011

...बेवफा बन जाता है

दैर-ओ-हरम से निकलते ही,ये क्या बन जाता है
अपनी खुद्दारी को सर पे लिए खुदा बन जाता है
मतलब की खातिर गले से लगा लेता है औरो को
ऐ आदमी एक पल में ही फिर तू बेवफा बन जाता है  

Wednesday, April 6, 2011

...मिलना होगा

मोड़ आयेंगे राहों में,फिर भी हमे चलना होगा
जुदा रह के भी हमे खयालो में मिलना होगा
सर्द होने न पाये कभी,ये  लहू अपनी यारी का
इसी आरजू में दोस्त,एक संग हमे जलना होगा 

Monday, March 28, 2011

पहले भी कुछ....

पहले भी कुछ मिलता था तुमसे,आज भी कुछ मिलता है
फर्क इतना ही है के मोहब्बत की जगह झिझक ने ली है
पहले भी ढूंढता था मै अक्सर,तुझ को तुझ ही में लेकिन
इस दायरे की जगह अब शायद,फैले हुवे उफक ने ली है

उफक--क्षितिज