Saturday, April 30, 2011

...बाकि कुछ हुवा भी नहीं

पूरी तरह से टुटा भी नहीं,पूरी तरह से बचा भी नहीं
बिच राह में खड़ा है रिश्ता,किसी तरफ गया भी नहीं
दिखाती है जो मक़ाम जिंदगी,मंजूर कैसे न करे हम 
दिल बस दुखता है जरासा,बाकी कुछ हुवा भी नहीं 

Friday, April 8, 2011

...बदल जाता है

वो रोज़ मिलते है तो ये दिल-ऐ-नादाँ बहल जाता है
कितनी बार गिरते गिरते दीवाना सम्हल जाता है डर लगता है लेकिन ये उम्मीद भी न टूट जाये कहीं 
के जरा सी बात पर आज-कल इंसान बदल जाता है 



Thursday, April 7, 2011

...बेवफा बन जाता है

दैर-ओ-हरम से निकलते ही,ये क्या बन जाता है
अपनी खुद्दारी को सर पे लिए खुदा बन जाता है
मतलब की खातिर गले से लगा लेता है औरो को
ऐ आदमी एक पल में ही फिर तू बेवफा बन जाता है  

Wednesday, April 6, 2011

...मिलना होगा

मोड़ आयेंगे राहों में,फिर भी हमे चलना होगा
जुदा रह के भी हमे खयालो में मिलना होगा
सर्द होने न पाये कभी,ये  लहू अपनी यारी का
इसी आरजू में दोस्त,एक संग हमे जलना होगा 

Monday, March 28, 2011

पहले भी कुछ....

पहले भी कुछ मिलता था तुमसे,आज भी कुछ मिलता है
फर्क इतना ही है के मोहब्बत की जगह झिझक ने ली है
पहले भी ढूंढता था मै अक्सर,तुझ को तुझ ही में लेकिन
इस दायरे की जगह अब शायद,फैले हुवे उफक ने ली है

उफक--क्षितिज

Friday, March 25, 2011

फिर से एक बार

वो जख्म भरेंगे कैसे,अगर बार बार छेड़े जाये
दिल क्यों न दुखेंगे,अगर बार बार तोड़े जाये
मोहब्बत करनेवाले तुमसे,यही चाहेंगे फिर भी
वो ठहरे हुवे रिश्ते,फिर से एक बार जोड़े जाये

Saturday, February 12, 2011

डोर-ए-जीस्त

ऐ दिल तू कोशिश ना कर,अब कोई दर्द मिटाने की  
आग में जल जा,पर आरजू ना कर इसे बुझाने की
कुछ सुनेगा तेरी,ऐसा कौन है अब इस दुनिया में
बस राह देख तू अब,ये डोर-ए-जीस्त टूट जाने की

जीस्त-जिंदगी