जलवों की धुप है लेकिन,वो उल्फत के साये कहा है
थाम सके जो जिंदगी मेरी,वो नाजुक सी बाहे कहा है
अपनी नजरो ने तो देखे है,दुनिया के रंगीन नज़ारे
अक्स अपना देख सकू जिसमे,वो निगाहे कहा है
Monday, June 29, 2009
Saturday, June 27, 2009
....नूर अफ्शां है
नाम-ऐ-मोहब्बत पे दिल आज भी फरमा-ऐ-सजदा है
दिल-ऐ-शिकस्ता में आज भी और टूटने का जज्बा है
कौन कहता है अंधेरे होते है चिराग के टूट जाने से
बुझके भी शमा-ऐ-इश्क मेरी,आज भी नूर अफ्शां है
फरमा-ऐ-सजदा-सर झुकानेवाला
नूर अफ्शां -रोशनी फैलानेवाली
दिल-ऐ-शिकस्ता में आज भी और टूटने का जज्बा है
कौन कहता है अंधेरे होते है चिराग के टूट जाने से
बुझके भी शमा-ऐ-इश्क मेरी,आज भी नूर अफ्शां है
फरमा-ऐ-सजदा-सर झुकानेवाला
नूर अफ्शां -रोशनी फैलानेवाली
Monday, June 22, 2009
मोहब्बत
तेरे ख्वाब में रात गुजरी,सुबह आयी तो हसरत हुवी
दिल के बदले में दिल गया,क्या खूब ये तिजारत हुवी
एक दर्द मीठा सा कैद हो चला है दिल के आगोश में
करवट बदली हालात ने,जो मुझे उनसे मोहब्बत हुवी
दिल के बदले में दिल गया,क्या खूब ये तिजारत हुवी
एक दर्द मीठा सा कैद हो चला है दिल के आगोश में
करवट बदली हालात ने,जो मुझे उनसे मोहब्बत हुवी
Thursday, May 28, 2009
ना कही के रहे
ना मौत मिली हमें,ना हम जिंदगी के रहे
ना आसमाँ पे पोहचे,ना हम जमी के रहे
ना उनको पाया और ना ही उन्हें भूल सके
मोहब्बत में आख़िर,ना हम कही के रहे
ना आसमाँ पे पोहचे,ना हम जमी के रहे
ना उनको पाया और ना ही उन्हें भूल सके
मोहब्बत में आख़िर,ना हम कही के रहे
Wednesday, May 27, 2009
अब तो चली आ
जजबातों का है इस दिल पे जोर,अब तो चली आ
तड़प का आलम है चारो और,अब तो चली आ
सहा नही जाता धडकनों का शोर,अब तो चली आ
टूटने को है ये सासों की डोर,अब तो चली आ
तड़प का आलम है चारो और,अब तो चली आ
सहा नही जाता धडकनों का शोर,अब तो चली आ
टूटने को है ये सासों की डोर,अब तो चली आ
Sunday, May 3, 2009
Monday, April 6, 2009
दिल की चुभन
छुडाना चाहू फ़िर भी छुटता नही दामन बे-करारी का
दिल में जो है चुभे हुवे,उन काटों में फस जाता है अक्सर
दिल में जो है चुभे हुवे,उन काटों में फस जाता है अक्सर
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