Tuesday, January 22, 2008

---किये जा

हर मंजिल तक सफर मुकम्मल किये जा
पुरजोर कोशीशे तू मुसलसल किये जा
कारवा मे तेरे फिर कोई हो न हो
हर बढ़ते कदम पे दिल तसल्ल किये जा

Sunday, January 20, 2008

सियासत

कभी हमे चाहनेवाले,आज हमसे अदावत करते हो
कोई अहेतराम नही,हर बात की शिक़ायत करते हो
क्या थोडा भी इल्म है तुम्हे अपने जुल्मो का

हमसे चाहते हो दुरी,अच्छी सियासत करते हो

तकदीर

हर शाम बीती शब-ए-वस्ल की चाह मे
हर सुबह आयी मायूसी की आह मे
हकीकत हम-जमी न बन सकी कभी ख्वाब की
यू ही जिंदगी गुजरी तकदीर-ए-सियाह मे

शब-ए-वस्ल---मिलन की रात
तकदीर-ए-सियाह---काली तकदीर

Saturday, December 29, 2007

जतन

ढूंढे नही मिला सुकू,मस्जिदों मे खराबातो मे
दिल बहल न पाया उनसे मुलाकातों मे
कोई जतन नजर नही आता मुझको,एक के सिवा

कुछ तो नरमी पैदा हो जाये उनके जज्बातों मे

Thursday, November 29, 2007

जन्मों-जन्मीच नातं

जन्मों-जन्मीचं नातं एका क्षणात तुट्लं का गं
पुन्हा जोडावं असं तुला नाही वाटलं का गं?

एकमेकांच्या सुखदुःखाचे प्रवाह काल पर्यंत होते एक
भावनेचं हे पाणीं मात्र आज आटलं का गं?

आपण दोन पक्षी,उड़त होतो एकाच आकाशी
प्रेमाच्या या पंखांना नशिबनं छाटलं का गं ?

दाखवण्यासाठी मला उगाच हसतोस तू
डोळ्यात मग तुझ्या पाणी दाटलं का गं?

सोड सगळे दुरावे, येऊ पुन्हा एकत्र आपण
आयुष्य अजून आहे बाकी,हे एवढ़्यावरच साठलं का गं?

वजह तो हो...

सजा देते हो तुम,मगर कोई गुनाह तो हो
चुराते हो नजर क्यो,इस जानिब एक निगाह तो हो
मेरी वफ़ा का मुझको मिला है कैसा ये सिला
हम से चाहते हो दुरी,मगर कोई वजह तो हो



Friday, November 9, 2007

क्या जाने

इस दिल के गम ए जानेजिगर तू क्या जाने
क्यों हुवा तू इतना बे-असर क्या जाने

एक था वो भी जमाना,दर्द था तेरे सीने मे
अचानक क्यों बन गया तू सितमगर क्या जाने