Friday, July 27, 2007

हाल-ए-दिल

किसीकी याद मे तड़पता है ये दिल
एक आरजू लिए धड़कता है ये दिल

लाख हो मैखाने इस शहर मे लेकिन
एक तेरे ख़याल से बहकता है ये दिल
किसीकी याद मे ...........

तेरी जुल्फ से गिरा वो फुल,सीने से लगाया मैंने
फुल से जियादा अब महकता है ये दिल
किसीकी याद मे ...........

दिखलाके एक झलक जाने वो कहा खो गए
कहा कहा न जाने अब भटकता है ये दिल
किसीकी याद मे.............

Tuesday, July 24, 2007

बड़ी बात क्या?

हम होश खोये हुवे है तो बड़ी बात क्या
आसमाँ खुद परेशां है तुझे जमी पे देखकर

तस्कीन

खुदा जिंदगी मेरी कुछ तो रंगीन हो जाये
वो आये तो तुझपे यकीन हो जाये
कब तक चलेंगे सिलसिले यु हिजाब-ओ-पर्दो के
दीदार-ए-यार हो तो दिल की तस्कीन हो जाये

दिल की बात करो

तनहाई की बाते हो चुकी,महफिल की बात करो
रस्तो के चर्चे हो चुके,मंजिल की बात करो
और कितना वक्त गुजरेगा यु झिझ्कने मे
नजरो के वादे तो हो चुके कुछ दिल की बात करो

कही खो gaye

लोग आगे निकल जाते है,बदल जाते है
खुद ही गिरते है,संभल जाते है
जिनकी रहो मे बिछायी थी हमने बहारे
वोही आके हर एक फुल मसल जाते है


Monday, July 23, 2007

क्या फर्क hai

क्या फर्क है,लगाया दिल आपसे या किसी पत्थर से
आख़िर टूटना ही था किस्मत मे इसकी

---बाकी hai

टूट के भी दिल मे अभी धड़कन बाकी है
अन-सुलझी हुवी अभी एक उलझन बाकी है
कहते जिंदगी खेल है सुख और दुःख का
ख़ुशी की अब तक लेकिन मुझसे अनबन बाकी है