Thursday, August 28, 2014

प्रतिबिम्ब तुझे

तुज स्पर्शाने खुललेली ती पाकळी पाकळी 
आठवते मज़ ते लाजणे,अन मन चिंब तुझे 
आज क्षितिजावर शोधतो मी माझे जग ते 
अन ओंजळीतल्या अश्रूंमधे प्रतिबिम्ब तुझे 



Wednesday, August 27, 2014

मनपाखरू माझे

नभी लागले उडू मनपाखरू माझे 
आठवणीत तिच्या वेडे हे उसासे 
स्वस्पर्षातही होतो आभास तिचा 
भान  कुठले आता मलाच माझे 

२७ ऑगस्ट

दिल जलता है तो जलने दे,आँसू न बहा फ़रियाद न कर। … पासून तर मै पल दो पल का शायर हूँ पर्यन्त
आपला प्रवास करणारे श्रेष्ठ गायक मुकेश यांचा आज ३८ वा स्मृतिदिन।

ओह रे ताल मिले नदी के जल में,नदी मिले सागर में,सागर मिले कौनसे जल में,कोई जाने ना.।
शैलेन्द्र नी लिहिलेले हे वास्तव मुकेश च्या आवाजात अजुन समर्पक वाटतं। …आणि खरच मुकेश नावाचा तो समुद्र आपल्या आयुष्यात कसा बे-मालूम पणे मिसळून गेला आहे याचं ही आपल्याला भान उरत नाही।

मुकेश चन्द्र माथुर यांना अभिवादन

Tuesday, August 26, 2014

बता नहीं सकता

क्या करू मै उसे यु ही भुला नहीं सकता 
अपने जज्बात लेकिन छुपा नहीं सकता 
मेरी बेताबीयो ने तो माना उसे है अपना  
रूबरू मगर उसको ये बता नहीं सकता 

Tuesday, July 22, 2014

...समाया जाता है

माना के बोझ है,पर ख़ुशी से ये भी उठाया जाता है 
इश्क़ वो इक दांव है,जो ज़िंदगी पे लगाया जाता है 
आपही मिटने लगती है हस्ती,मुद्दतों सम्हाली हुवी 
चुपके से जब इक अजनबी,रूह में समाया जाता है 

@ मनिष गोखले... 

Wednesday, July 9, 2014

...रहा हूँ आजकल

नाम-ए-उल्फत के बहाने दिल को सता रहा हूँ आजकल 
किसी की खातिर मैं खुद को ही भूला रहा हूँ  आजकल 
इश्क़ किया तो जाना के दर्द की सिवा कुछ भी नहीं 
बड़ी ख़ुशी से लेकिन ये गम उठा रहा हूँ आजकल 

Friday, July 4, 2014

...बिखरा गयी वों

मेरी नजर-ए-शौक से हाय शरमा गयी वों  
न जाने अपने आँचल को यु लहरा गयीं वों 
मै चश्म-दीद बना जो उसकी धड़कनो का 
मानो हजारो कलियाँ फज़ा में बिखरा गयी वों