Friday, June 20, 2014

...ढलते है

बड़ी मुश्किल से ये कदम मिलते है,
कभी कभी तो लोग साथ चलते है 
वर्ना कभी तो कतराते है साये भी 
जब शाम से पहले ही दिन ढलते है 

Tuesday, June 10, 2014

न जिन्दा रही न मर गयी,कहानी-ए-दिल यर्गमाल हो गयी 
आरजू-ए-बेहतरी में अक्सर,अपने ही पैरो से पामाल हो गयी 
ज़ेर-ए-तामीर फिर भी रखे हमने,इन उम्मीदों के आशियाने 
हर कोशिश-ए-तामीरी मगर,आप ही शिकस्ता हाल हो गयी 

यर्गमाल --ओलीस राहने
पामाल--पायदळी तुडवणे
ज़ेर-ए-तामीर--Under Construction




Monday, June 9, 2014

...बदल गया हूँ

दर्द उठाना लिखा था,दर्द में ढल गया हूँ 
अब तो आंसू भी नहीं आते,इतना बदल गया हूँ 
मुझको आवाज़ न देना मेरे हमनशीनो 
मै न मिलूंगा अब कभी,आगे निकल गया हूँ 

Monday, June 2, 2014

...मिलाना भी है

तुमसे खफा भी हूँ और तुमको मनाना भी है 
ये अन-चाहा बोज़ अब मुझको उठाना भी है 
दिल अब भी नहीं मानता तेरी इस जुदाई को 
एक बार तुमसे मिलके,खुद से मिलाना भी है 

Saturday, May 31, 2014

...किसका ये गुनाह है

क्या पता किसकी खता है,किसका ये गुनाह है 
सच तो ये है के आज दिल मुकम्मल तबाह है 
गुजरते हुवे वक़्त ने छीन लिया है मुझसे उनको 
धुंधलाते उनके सायो पे अब भी मेरी निगाह है 

Wednesday, May 28, 2014

....तेरी मजबूरीयों का

बेवफा तुझको भी कहु कैसे,मुझे अहसास तेरी मजबूरीयों का
प्यार किया है तुमसे तो,मुझे भी पता है मेरी कमजोरियों का 
आसान नहीं है फिर भी ये जानना के अब साथ नहीं है अपना 
नजर आ रहा है मुझको वो मंजर जिंदगी की दुश्वारियों का 




Tuesday, May 27, 2014

...जिंदगानी नहीं है

क्या करे साथ तेरे अब और ये जिंदगानी नहीं है 
मेरी नजर में फिर भी तेरा कोई सानी  नहीं है
तेरा तसव्वुर तेरी आरज़ू तो है आज भी मुझको 
है एक सोज़ दिल में मगर आखो में पानी नहीं है