Wednesday, May 14, 2014

...के बाद

सोचता हूँ के कितनी बार लिया होगा मैने नाम तुम्हारा 
शायद उतना ही,जितनी साँसे जीया हू तुम्हे चाहने के बाद 
और क्या जुस्तजू रही होगी,मेरी इन तरसती निगाहो को 
और भला क्या देखना चाहेगी वो बेचारी,तुम्हे देखने के बाद 

Monday, May 12, 2014

ऐसा भी हो सकता है?

मै कुछ कहूँ और तुम खामोश रहो,क़ोई ताल्लुक ऐसा भी हो सकता है? 
मै पलके बिछउ और तुम न आओ,कोई तक़ल्लुफ़ ऐसा भी हो सकता है? 

Thursday, May 8, 2014

...हो जाउ

तेरा खयाल न करू तो इस दिल का मुज़रिम हो जाउ  
तेरे खयालो मे रहू,तो दर्द ओ गम मे तक़सीम हो जाउ  
तू ही बता दे अब के कैसे निभाउ मै ये मोहब्बत तेरी 
तू कहे तो जी लू,ना कहे तो जिन्दगी से यतीम हो जाउ 

Tuesday, April 29, 2014

...इंतजार तेरा

खुली पलक मे तेरी ज़ुस्तज़ु,बन्द पलको मे दींदार तेरा 
ला-इलाज अब तो है मर्ज़ ये,मै तो हु एक बीमार तेरा 
जगा देँगी ये तडप मेरी,मेरा सोया हुवा मुक़द्दर भी 
तह -ऐ-रूह मे सुलगता है,न जाने कब से इंतजार तेरा 

Wednesday, April 16, 2014

...न छोड़ सकूंगा

छोड़ दूंगा ये दुनिया,पर ये ख्वाब न छोड़ सकूंगा 
वो इबादत है मेरी,मै  ये सवाब न छोड़ सकूंगा
तड़प है सुकु है फिर भी,के है प्यार मुझे उस से 
है कसम उसकी,मै ये इंतख्वाब न छोड़ सकूंगा 

Wednesday, April 2, 2014

...सिलसिला तो देखिये

इन्तेख्वाब मंज़िल ऐ उफक का,मेरा ये हौसला तो देखिये 
रहू जमी पर और छू लू आसमा,मेरा ये फैसला तो देखिये 
माना होंगे काटे हर राह में,मगर है कुछ मजा इसमें भी
अब न रुकुंगा कही,अपनी ज़िद का ये सिलसिला तो देखिये   


उफक---क्षितिज 

Monday, March 31, 2014

...न दिया

खामोश रखा जुबा को,और अश्क़ो को बहने न दिया 
जला आतिश ऐ उल्फत में,और धुवे को उठने न दिया 
खबर मेरी दीवानगी की फिर भी चली इस ज़माने को 
मेरी आखो ने भेद खोला,मैंने तो लाख खुलने न दिया