Thursday, October 31, 2013

तक़दीर

ये तक़दीर जो ठहरी मेरी,के प्यार जिन से किया 
वोही बदगुमाँ हो गए … 
इंतेहा दर्द कि अब और क्या होगी 
के उनकी नजर में हम ही बे-वफ़ा हो गए 

Saturday, June 22, 2013

वाह क्या नजर है उसकी,और कहने को हबीब-ए-अज़ीज़ है 
मै जानता हु क्या तंग-जर्फ़ है वो,नीयत उसकी गलीज़ है 
उम्रभर खेल के जा पे हमने साथ निभाया उसका मुसलसल 
जान गवाने को आया हु अब,और समझा के वो क्या चीज़ है 




Tuesday, June 18, 2013

फिर आखो में है तुफा...

फिर आखो में है तुफा,फिर लगा ये दिल धड़कने 
फिर ख्वाब-ओ-ताबीर में जीस्त लगी है उलझने 
फिर एक शिद्दत सी मेरी सासों में है जागी हुवी 
फिर जिस्म-ओ-रूह मेरी आज लगी है तडपने  





Tuesday, February 5, 2013

...बेवफाई तुम्हारी

अब और न सहेंगे हम ये बेवफाई तुम्हारी 
चाहे सहनी पड़ी अब हमे ये जुदाई तुम्हारी 
बड़े गम-गुसार बने फिरते हो तुम जहा में 
तुम्हारे पास ही रखो अब ये खुदाई तुम्हारी 

Monday, January 7, 2013

...न ले जाओ

मै रहना चाहता हु जमी पे,मुझे आसमा तक न ले जाओ 
मै तो हु बे-घर ही अच्छा,मुझे आशिया तक न ले जाओ 
ये कैसा हुजूम देख रहा हु मै इन अजनबी लोगो का 
तनहा ही रहने दो मुझको,उस कारवा तक न ले जाओ 

Monday, August 27, 2012

जब से छोड़ा है तुमने मुझ को 
तुम तो अब तुम्हारे भी न रहे 
जिन सितारों की खातिर तुमने चाँद को है ठुकराया 
अफ़सोस! फलक पे अब वो सितारे भी न रहे ......

Monday, March 5, 2012

...ऐसा कुछ भी नहीं

मुझे तुमसे नफरत है,ऐसा कुछ भी नहीं
दिल को एक गैरत है,ऐसा कुछ भी नहीं
बाकी है यादे तेरी,मेरे मजलिस-ए-दिल में
ये दौर-ए-खिलवत है,ऐसा कुछ भी नहीं