Saturday, June 27, 2009

....नूर अफ्शां है

नाम-ऐ-मोहब्बत पे दिल आज भी फरमा-ऐ-सजदा है
दिल-ऐ-शिकस्ता में आज भी और टूटने का जज्बा है
कौन कहता है अंधेरे होते है चिराग के टूट जाने से
बुझके भी शमा-ऐ-इश्क मेरी,आज भी नूर अफ्शां है

फरमा-ऐ-सजदा-सर झुकानेवाला
नूर अफ्शां -रोशनी फैलानेवाली

Monday, June 22, 2009

मोहब्बत

तेरे ख्वाब में रात गुजरी,सुबह आयी तो हसरत हुवी
दिल के बदले में दिल गया,क्या खूब ये तिजारत हुवी
एक दर्द मीठा सा कैद हो चला है दिल के आगोश में
करवट बदली हालात ने,जो मुझे उनसे मोहब्बत हुवी

Thursday, May 28, 2009

ना कही के रहे

ना मौत मिली हमें,ना हम जिंदगी के रहे
ना आसमाँ पे पोहचे,ना हम जमी के रहे
ना उनको पाया और ना ही उन्हें भूल सके
मोहब्बत में आख़िर,ना हम कही के रहे

Wednesday, May 27, 2009

अब तो चली आ

जजबातों का है इस दिल पे जोर,अब तो चली आ
तड़प का आलम है चारो और,अब तो चली आ
सहा नही जाता धडकनों का शोर,अब तो चली आ
टूटने को है ये सासों की डोर,अब तो चली आ

Sunday, May 3, 2009

आहट

किसी आहट से देखता हूँ दर-ऐ-बज्म की जानिब
शायद आ जाए कही से वो मेरे मेहमा बन के

Monday, April 6, 2009

दिल की चुभन

छुडाना चाहू फ़िर भी छुटता नही दामन बे-करारी का
दिल में जो है चुभे हुवे,उन काटों में फस जाता है अक्सर

दुनिया उन्ही से

तमाम कायनात क्यों न लगे मुझको हसी
हर जर्रे में है वो अक्स अपना छुपाये हुवे