बड़े ना-आशना थे हम पहले इस जहाँ में,
तेरी आरजू में मिटे तो वजूद बना हमारा
ना-आशना-अजनबी
Monday, March 9, 2009
Wednesday, February 18, 2009
ख़ुद को भुला दिया
होश में आ गए हम होश गवाने के बाद
एक कतरा भी पी न सके जाम उठाने के बाद
कुछ भी याद नही मुझे बस एक तेरे सिवा
तुझको पा लिया है मैंने खुदको भुलाने के बाद
एक कतरा भी पी न सके जाम उठाने के बाद
कुछ भी याद नही मुझे बस एक तेरे सिवा
तुझको पा लिया है मैंने खुदको भुलाने के बाद
Monday, February 16, 2009
तुम्हे भुलाऊ कैसे?
तेरे गम के पियाले होठो से लगाऊ कैसे?
शम्मा अपने इश्क की ख़ुद बुझाऊ कैसे?
कितनी हसरत से सजाये थे ख्वाब मैंने
बसाके तुम्हे अपने दिल में भुलाऊ कैसे?
शम्मा अपने इश्क की ख़ुद बुझाऊ कैसे?
कितनी हसरत से सजाये थे ख्वाब मैंने
बसाके तुम्हे अपने दिल में भुलाऊ कैसे?
Wednesday, February 11, 2009
मोहब्बत जिंदगी है
याद उनके तबस्सुम आये,तो अश्क बहने लगे
तड़प के इस दिल के जर्रे कुछ और दर्द सहने लगे
भुलाने से भूल जाये ये फलसफा-ऐ-इश्क कहाँ?
नही सिवा उनके ये जिंदगी,दिल के तार कहने लगे
तड़प के इस दिल के जर्रे कुछ और दर्द सहने लगे
भुलाने से भूल जाये ये फलसफा-ऐ-इश्क कहाँ?
नही सिवा उनके ये जिंदगी,दिल के तार कहने लगे
Monday, January 26, 2009
तू है वही
जाने क्यों लगता है मुझे,के तू है वही
तलाश जिसकी मुझको,सदियों से रही
वर्ना और भी है यहाँ दिल लुभाने वाले
जो बात तुझमे है,वो किसी और में नही
तलाश जिसकी मुझको,सदियों से रही
वर्ना और भी है यहाँ दिल लुभाने वाले
जो बात तुझमे है,वो किसी और में नही
Sunday, December 7, 2008
आओ करीब इतने...
आओ करीब इतने,के तेरी जुल्फ बिखर जाये मेरी शानो पर
आओ करीब इतने,के जोर धडकनों का हो दिल के खानों पर
के मेरी साँसों में घुल जाने दो आज अपनी साँसों का शमीम
आओ करीब इतने,के बर्क लहरा जाये इश्क के आसमानों पर
शानो पर -कंधे पर
आओ करीब इतने,के जोर धडकनों का हो दिल के खानों पर
के मेरी साँसों में घुल जाने दो आज अपनी साँसों का शमीम
आओ करीब इतने,के बर्क लहरा जाये इश्क के आसमानों पर
शानो पर -कंधे पर
Thursday, December 4, 2008
तकदीर-ऐ-इश्क
जो न कही अब तक,वो बात उन्हें आज बताऊंगा मैं
कदमो में उनके रख के दिल,किस्मत आजमाऊंगा मैं
गर होंगे कुबूल उनको मेरी बेताब धडकनों के नजराने
तकदीर-ऐ-रोशन पे मेरी फ़िर जी भर के इतराउंगा मैं
कदमो में उनके रख के दिल,किस्मत आजमाऊंगा मैं
गर होंगे कुबूल उनको मेरी बेताब धडकनों के नजराने
तकदीर-ऐ-रोशन पे मेरी फ़िर जी भर के इतराउंगा मैं
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