Thursday, February 21, 2008

महक

जरूर आई होगी ये बाद-ऐ-सबा उनके आँचल को छू कर
वरना किसी और मे वो बात कहा,जो महका सके इस जहाँ को

Friday, February 15, 2008

भरम

सोचा था मैंने के आप संग-दिल नही,
अब के जाना,आप के सीने मे पत्थर के सिवा कुछ भी नही

Saturday, February 2, 2008

दोस्ती

छूटे तो छुट जाये पतवार मेरी कश्ती का
मिटे तो मिट जाये निशा मेरी हस्ती का
दर्द भी ख़ुशी बन जाएगा मेरे लिए
जब तलक रहूंगा थामे दामन मैं तेरी दोस्ती का

Tuesday, January 22, 2008

---किये जा

हर मंजिल तक सफर मुकम्मल किये जा
पुरजोर कोशीशे तू मुसलसल किये जा
कारवा मे तेरे फिर कोई हो न हो
हर बढ़ते कदम पे दिल तसल्ल किये जा

Sunday, January 20, 2008

सियासत

कभी हमे चाहनेवाले,आज हमसे अदावत करते हो
कोई अहेतराम नही,हर बात की शिक़ायत करते हो
क्या थोडा भी इल्म है तुम्हे अपने जुल्मो का

हमसे चाहते हो दुरी,अच्छी सियासत करते हो

तकदीर

हर शाम बीती शब-ए-वस्ल की चाह मे
हर सुबह आयी मायूसी की आह मे
हकीकत हम-जमी न बन सकी कभी ख्वाब की
यू ही जिंदगी गुजरी तकदीर-ए-सियाह मे

शब-ए-वस्ल---मिलन की रात
तकदीर-ए-सियाह---काली तकदीर

Saturday, December 29, 2007

जतन

ढूंढे नही मिला सुकू,मस्जिदों मे खराबातो मे
दिल बहल न पाया उनसे मुलाकातों मे
कोई जतन नजर नही आता मुझको,एक के सिवा

कुछ तो नरमी पैदा हो जाये उनके जज्बातों मे