Wednesday, August 29, 2007

अदा

तेरी अदाओं ने सिखाया है इस दिल को धड़कना,
खुदा करे तू यु ही जलवे लुटती रहे मेरे जीने के लिए

सिलसिला

एक जो तुझसे नजर मिली,फिर चलता रहा सिलसिला दर्द का
बुझते बुझते जल उठी है हर बार ये चिंगारिया

Saturday, August 18, 2007

सुकून

कंधे पे सर रख के झुल्फो मे खोने दो मुझको
यु कुछ देर लिपट के तुमसे सोने दो मुझको

इन्ही लम्हों के खातीर जी रहा था अब तक
जी भर के इस जिंदगी का होने दो मुझको

जुदाई

जीते जी कब जुदा होता है जिस्म खु से
नजर कब दूर रह सकी है आसू से
इश्क किया है जिसने वो कैसे करे इन्कार
दिल-ए-आशिक कब जुदा हुवा है आरजू से


छोड़ दो...

रहनो दो वो हुस्न मेरी तकदीर मे नही
मेरे ख्वाब मे तो है मगर मेरी ताबीर मे नही
हर रास्ते को कहा मिलती है मंजिल यहाँ पर
वो मेरे आगाज मे तो है मगर मेरी आख़िर मे नही

Wednesday, August 15, 2007

उम्मीद

मैं जर्रा इस जमीं का
तू परी किसी दुसरे आसमाँ की
फिर भी दिल मे उम्मीद है बाकी
के देखा है कही आसमाँ को जमी से मिलते हुवे

आरजू

हजारो ख्वाहिशे जगती है दिल मे एक तेरे ख़याल से
और आप है के पूछते हो के क्या आरजू है तुम्हारी