तेरी अदाओं ने सिखाया है इस दिल को धड़कना,
खुदा करे तू यु ही जलवे लुटती रहे मेरे जीने के लिए
Wednesday, August 29, 2007
Saturday, August 18, 2007
सुकून
कंधे पे सर रख के झुल्फो मे खोने दो मुझको
यु कुछ देर लिपट के तुमसे सोने दो मुझको
इन्ही लम्हों के खातीर जी रहा था अब तक
जी भर के इस जिंदगी का होने दो मुझको
यु कुछ देर लिपट के तुमसे सोने दो मुझको
इन्ही लम्हों के खातीर जी रहा था अब तक
जी भर के इस जिंदगी का होने दो मुझको
जुदाई
जीते जी कब जुदा होता है जिस्म खु से
नजर कब दूर रह सकी है आसू से
इश्क किया है जिसने वो कैसे करे इन्कार
दिल-ए-आशिक कब जुदा हुवा है आरजू से
नजर कब दूर रह सकी है आसू से
इश्क किया है जिसने वो कैसे करे इन्कार
दिल-ए-आशिक कब जुदा हुवा है आरजू से
छोड़ दो...
रहनो दो वो हुस्न मेरी तकदीर मे नही
मेरे ख्वाब मे तो है मगर मेरी ताबीर मे नही
हर रास्ते को कहा मिलती है मंजिल यहाँ पर
वो मेरे आगाज मे तो है मगर मेरी आख़िर मे नही
मेरे ख्वाब मे तो है मगर मेरी ताबीर मे नही
हर रास्ते को कहा मिलती है मंजिल यहाँ पर
वो मेरे आगाज मे तो है मगर मेरी आख़िर मे नही
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