कहता है जमाना,भर जाता है हर जख्म मरहम-ए-वक्त से
पर,कैसे मिटे दाग-ए-दिल उनके रुका है वक्त जिनके लिए
Wednesday, August 15, 2007
Tuesday, August 14, 2007
गम न करेंगे
गम न करेंगे तू जो साथ है
गम न करेंगे तकदीर जो तेरे हाथ है
तू जो रूठे तो मना लेंगे
तू जो हँसे तो क्या बात है
गम न करेंगे तकदीर जो तेरे हाथ है
तू जो रूठे तो मना लेंगे
तू जो हँसे तो क्या बात है
खामोशी
चाहे ख्वाबों मे उनसे जितनी भी मुलाक़ात किजीये
दर्द-ए-दिल बढ़ जाता है जितने भी उनके ख़यालात किजीये
हर सवाल का जवाब ग़र खामोशी है यहाँ पर
फिर चाहे जिन्दगी से कितने भी सवालात किजीये
दर्द-ए-दिल बढ़ जाता है जितने भी उनके ख़यालात किजीये
हर सवाल का जवाब ग़र खामोशी है यहाँ पर
फिर चाहे जिन्दगी से कितने भी सवालात किजीये
तो अच्छा था
वही मंजिले मुझको मिली, जो न मिलती तो बहोत अच्छा था
काटो के सीवा कालिया खिली,जो न खिलती तो बहोत अच्छा था
झूठी खुशियों का वादा लेकर सुबह आयी,रात ढलने के बाद
वो गम की शाम ही न ढलती तो बहोत अच्छा था
काटो के सीवा कालिया खिली,जो न खिलती तो बहोत अच्छा था
झूठी खुशियों का वादा लेकर सुबह आयी,रात ढलने के बाद
वो गम की शाम ही न ढलती तो बहोत अच्छा था
Saturday, August 4, 2007
शौक़-ए-शायरी
इन गेसुओ की काली घटा बन गयी है रोशनी मेरी
मदहोश अदा तेरी बन गयी है बेखुदी मेरी
तहय्युर-ए-हुस्न मे न आते थे लब्ज जबाँ पे,तेरे मिलने से पहले
शौक़-ए-शायरी बन गयी है अब जिंदगी मेरी
मदहोश अदा तेरी बन गयी है बेखुदी मेरी
तहय्युर-ए-हुस्न मे न आते थे लब्ज जबाँ पे,तेरे मिलने से पहले
शौक़-ए-शायरी बन गयी है अब जिंदगी मेरी
जिंदगी मिलती नही
जिंदगी मिलती नही और कमबख्त मौत भी आती नही
टूटता भी नही जाम खाली और शराब भी मिलती नही
अँधेरा ही अँधेरा है जिस जानिब देखू मैं
सुबह भी होती नही और रात भी ढलती नही
टूटता भी नही जाम खाली और शराब भी मिलती नही
अँधेरा ही अँधेरा है जिस जानिब देखू मैं
सुबह भी होती नही और रात भी ढलती नही
Thursday, August 2, 2007
दिल
बे-इन्तहा बे-वजह बेकाबू हो गया
ये दिल,दिल ना रहा खाना-ए-आरजू हो गया
एक पल भी अब चैन आये कहा से
मकसद-ए-जिंदगी यार की जुस्तजू हो गया
ये दिल,दिल ना रहा खाना-ए-आरजू हो गया
एक पल भी अब चैन आये कहा से
मकसद-ए-जिंदगी यार की जुस्तजू हो गया
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